स्वामीविवेकानंद
आज 12
जनवरी को सम्पूर्ण रष्ट्र में विवेकान्द जयंती के रूप में मनाया जा रहा है। इसे हम
भारतीय संस्कृति को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने वाले महापुरुष स्वामी विवेकानंद का
जन्म 12
जनवरी 1863
को हुआ था। ऐसी महान विभूती के जन्म से भारत माता भी गौरवान्वित हुईं। स्वामी
विवेकानंद को याद करने की एक बड़ी बजह यह भी है कि एक सम्पूर्ण सश्क्त राष्ट्र भारत
देश की हमारी जो परिकलपना थी उसकी आकृति
उन्होनें हमे साफ—साफ
बताई। विवेकानंद वह व्यक्ति थे, जिन्होनें
अपने देश ही नही वल्कि विदेशों तक में यात्राएं कर भारत देश की झान एवं संस्कृतिक
भावचित्र की पहचान विश्व में चिन्हित किया। भरत देश को माता मानने वाले व्यक्तियों
में से वे एक थे। भारत के अनेकों ऋषि-मुनियों ने हिमालय में तपस्या की यदी
हम भारत देश को माँ के रूप में देखे तो ऋषियों ने माँ के सिर पर बैठकर साधना किया।
वहीं
पर स्वामी विवेकानंद जी ने माँ के चरणों में यानी की कन्याकुमारी में बैठ कर
तपस्या करते दिखते हैं।
जनवरी को सम्पूर्ण रष्ट्र में विवेकान्द जयंती के रूप में मनाया जा रहा है। इसे हम
भारतीय संस्कृति को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने वाले महापुरुष स्वामी विवेकानंद का
जन्म 12
जनवरी 1863
को हुआ था। ऐसी महान विभूती के जन्म से भारत माता भी गौरवान्वित हुईं। स्वामी
विवेकानंद को याद करने की एक बड़ी बजह यह भी है कि एक सम्पूर्ण सश्क्त राष्ट्र भारत
देश की हमारी जो परिकलपना थी उसकी आकृति
उन्होनें हमे साफ—साफ
बताई। विवेकानंद वह व्यक्ति थे, जिन्होनें
अपने देश ही नही वल्कि विदेशों तक में यात्राएं कर भारत देश की झान एवं संस्कृतिक
भावचित्र की पहचान विश्व में चिन्हित किया। भरत देश को माता मानने वाले व्यक्तियों
में से वे एक थे। भारत के अनेकों ऋषि-मुनियों ने हिमालय में तपस्या की यदी
हम भारत देश को माँ के रूप में देखे तो ऋषियों ने माँ के सिर पर बैठकर साधना किया।
वहीं
पर स्वामी विवेकानंद जी ने माँ के चरणों में यानी की कन्याकुमारी में बैठ कर
तपस्या करते दिखते हैं।
स्वामी विवेकानंद उस समय सम्पूर्ण
युग को देख रहे थे, उनके
शब्दों में वे प्रत्येक भारतीय को पूर्ण और भारत देश को एक सशक्त राष्ट्र के रूप
में निर्माण होते देखना चाहते थे। स्वामी विवेकानंद राष्ट्र के दलितों पिछड़ों एवं
शोषित वर्ग के लोगों के उत्थान के लिए श्रेष्ठ प्रयास करते रहे उन्होनें प्रथम वार
ऐसे लोगों को दरिद्र नारायण कहा और उनके के लिए भण्डारा एवं भोज का आयोजन किया।
युग को देख रहे थे, उनके
शब्दों में वे प्रत्येक भारतीय को पूर्ण और भारत देश को एक सशक्त राष्ट्र के रूप
में निर्माण होते देखना चाहते थे। स्वामी विवेकानंद राष्ट्र के दलितों पिछड़ों एवं
शोषित वर्ग के लोगों के उत्थान के लिए श्रेष्ठ प्रयास करते रहे उन्होनें प्रथम वार
ऐसे लोगों को दरिद्र नारायण कहा और उनके के लिए भण्डारा एवं भोज का आयोजन किया।
आज दिनांक 12
जनवरी
को स्वामी विवेकानंद जयंती के रूप में मनाया जाता है। वे अपने गुरु रामकृष्ण
परमहंस देव से बहुत प्रभावित थे उन्होंने अपने गुरु से सीखा कि समस्त जीव स्वयं
परमात्मा का ही एक अशं के रूप में अवतार हैं। इसलिए मानव जाति की सेवा द्वारा भी
परमात्मा की सेवा की जा सकती है। रामकृष्ण की मृत्यु के पश्चात स्वामी विवेकानंद
ने बड़े पैमाने पर सम्पूर्ण भारतीय उपमहाद्वीप का दौरा किया और बाद में विश्व धर्म
संसद 1893
में
भारत का प्रतिनिधित्व करने संयुक्त
राज्य अमेरिका के लिए गए। विवेकानंद के संयुक्त राज्य अमेरिका,
इंग्लैंड
और यूरोप में हिंदू दर्शन के सिद्धांतों का प्रसार करने के साथ ही साथ सैकड़ों
सार्वजनिक और निजी व्याख्यानों का भी आयोजन किया। भारत में
विवेकानंद
को एक परम देशभक्त संत के रूप में माना-जाना जाता है और उनके जन्मदिन को राष्ट्रीय
युवा दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।
जनवरी
को स्वामी विवेकानंद जयंती के रूप में मनाया जाता है। वे अपने गुरु रामकृष्ण
परमहंस देव से बहुत प्रभावित थे उन्होंने अपने गुरु से सीखा कि समस्त जीव स्वयं
परमात्मा का ही एक अशं के रूप में अवतार हैं। इसलिए मानव जाति की सेवा द्वारा भी
परमात्मा की सेवा की जा सकती है। रामकृष्ण की मृत्यु के पश्चात स्वामी विवेकानंद
ने बड़े पैमाने पर सम्पूर्ण भारतीय उपमहाद्वीप का दौरा किया और बाद में विश्व धर्म
संसद 1893
में
भारत का प्रतिनिधित्व करने संयुक्त
राज्य अमेरिका के लिए गए। विवेकानंद के संयुक्त राज्य अमेरिका,
इंग्लैंड
और यूरोप में हिंदू दर्शन के सिद्धांतों का प्रसार करने के साथ ही साथ सैकड़ों
सार्वजनिक और निजी व्याख्यानों का भी आयोजन किया। भारत में
विवेकानंद
को एक परम देशभक्त संत के रूप में माना-जाना जाता है और उनके जन्मदिन को राष्ट्रीय
युवा दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।
जी.के. चक्रवर्ती